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क्या लिखा है अग्नि के बारे में वेदो में

वेद संस्कृत में लिखे हैं और आज हम संस्कृत पढ़ नहीं सकते हैं.

इसी कारण से धर्म की कई सारी विशेष बातों से हम अनजान होते हैं.

एक समय था जब समाज में बच्चों को वेद विद्या दी जाती थी और वेदों के अनुसार जीवनयापन करने का अध्याय बच्चों को रटाया जाता था. किन्तु आज वेद हिन्दू धर्म में मिथ्या होते जा रहे हैं.

ऐसा ही कुछ वेदों में अग्नि के बारें में बताया गया है. वेदों में अग्निहोत्र के बारें में जो बताया है उसके बारें में तो हर हिन्दू को जरूर ज्ञान होना चाहिए.

तो चलिए आपको आज हम अग्नि के बारें में और अग्निहोत्र के बारें में वेद ज्ञान देते हैं-

अग्नि के बारें में

अग्नि के बिना असंभव है देवताओं की पूजा

वेदों ने अग्नि को देवी शक्ति का रूप बताया है. अग्नि के बिना आप देवताओं की पूजा कर नहीं सकते हैं. या फिर बोलें कि बिना अग्नि के आपकी पूजा संपन्न हो ही नहीं सकती है. वेदों में अग्नि को हव्यवाहन बताया गया है. अग्नि के बिना इंसान को ना जन्म मिल सकता है और ना ही उसकी मुक्ति संभव है.

वेद बताते हैं कि आप भले ही किसी भी ईश्वर रूप की उपासना करते रहें, चाहे शिव रूप की या माता रूप की, किन्तु आपकी आहुति इन तक तब तक नहीं पहुच सकती है जब तक आप अग्नि में आहुति ना दें. इसलिए अग्नि को देवताओं का मुख बताया गया है. तो अब आप समझ रहे हैं ना कि अग्नि देवताओं की पूजा में कितनी महत्वपूर्ण है? अग्नि देवताओं का मुख है. आप जब खाना खाते हैं तो आप अपने मुंह में भोजन डालते हैं, इसी प्रकार से देवताओं को उद्देश्कर दिया जाना वाला हविभार्ग अग्नि में ही अर्पण किया जाता है.

वेद बताते हैं कि व्यक्ति को कभी भी अग्नि का अपमान नहीं करना चाहिए. अग्नि के प्रति आदर रखें और अग्नि की नित्य रोज पूजा की जानी काफी जरुरी है.

तो अब अग्नि के बाद वेदों में अग्निहोत्र के बारें में भी काफी जरुरी बातें बताई गयी हैं. अग्निहोत्र की नित्य रोज की प्रक्रिया अब हिन्दू समाज से गायब हो गयी है लेकिन एक समय हर घर में सुबह-शाम अग्निहोत्र किया जाता था-

क्या होता है अग्निहोत्र?

सबसे पहले यह जान लो कि अग्निहोत्र अग्नि की पूजा है. या बोले कि अग्नि के द्वारा अपने इष्ट देवता तक पहुचने का रास्ता ही अग्निहोत्र है. यहाँ होत्र वह किया बताई गयी है जिसमें अग्नि में आहुत किये जाने वाले चार प्रकार के द्रव्यों की आहुतियां दी जाती हैं. यह चार प्रकार के द्रव्य हैं- गोधृत व केसर, कस्तूरी आदि सुगन्धित पदार्थ, मिष्ट पदार्थ शक्कर, शुष्क अन्न, फल व मेवे आदि तथा ओषधियां वा वनस्पतियां जो स्वास्थ्यवर्धक होती हैं. देवताओं के मुख तक यह चीजें पहुँचाने के लिए अग्निहोत्र का सहारा लिया जाता है. सामान्य शब्दों में आपने हवन देखा ही होगा, तो उसको अग्निहोत्र बोला जाता है.

अग्निहोत्र से मिलती है मन को शान्ति

किसी भी प्रकार की पूजा में बिना अग्निहोत्र के आप अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकते हैं. अग्निहोत्र से वातावरण तो साफ होता ही है, साथ में व्यक्ति को मन की शान्ति मिलती है. एक सामान्य व्यक्ति भी रोज सुबह-शाम अग्निहोत्र कर सकता है. सामान्य पूजा को भी अग्निहोत्र एक ख़ास पूजा बना देता है.

इसलिए हर हिन्दू व्यक्ति को कोशिश करनी चाहिए कि उसके घर में हर रोज सुबह और शाम अग्निहोत्र जरूर किया जाये.

अग्निहोत्र से वातावरण शुद्ध होता है ऐसा तो अब विज्ञान भी बताने लगा है. वेदों ने बताया है कि अग्निहोत्र ही स्वर्ग तक जाने का रास्ता भी है. तो अब आप अग्नि और अग्निहोत्र के महत्त्व को समझ गये होंगे.

 
 
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